घरवालों के खिलाफ Sushma Swaraj ने की थी लव मैरिज, फिर बनी देश का गौरव

Sushma Swaraj in Hindi बीजेपी की एक महान नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का करीब 9 बजे निधन हो गया। उन्हें देर शाम हार्ट अटैक आया और इसके बाद उन्हें दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS में आखिरी सांस ली। उनका परिवार उन्हें एम्स ले गया और वे 67 साल की उम्र में दुनिया छोड़ गईं। इसमें हैरानी वाली बात ये है कि करीब 7 बजे उन्होंने अपना आखिरी ट्वीट किया था और करीब 2 घंटे बाद ही उनका निधन हो गया। Sushma Swaraj के निधन की खबर सामने आते ही पूरा देश खासकर बीजेपी के नेता स्तब्ध हो गए हैं।



Sushma Swaraj का प्रारंभिक जीवन

14 फरवरी, 1952 को सुषमा स्वराज का जन्म हरियाणा के अंबाला कैंट में हुआ था। इनके पिता आरएसएस के प्रमुख सदस्य हरदेव शर्मा थे।बचपन से ही सुषमा जी में एक क्रांतिकारी भाव था जिसे वे अक्सर अपने स्कूल-कॉलेज के प्लेज में दिखाया करती थीं। अंबाला छावनी के एस.एस.डी कॉलेज से बी.ए. करने के बाद उन्होंने चंडीगढ़ से कानून की डिग्री लेने के लिए पढ़ाई की। साल 1973 में सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रेक्टिस भी शुरु कर दी थी। सुषमा जी कर तो वकालत की प्रैक्टिस रही थीं लेकिन उनका राजनीति में ज्यादा मन था। जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ शुरु किया और छात्र जीवन से ही वे प्रवक्ता बनने लगीं। वकालत की पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात देश के युवा एडवोकेट जनरल स्वराज कौशल से हुई थी। सुषमा स्वराज को वो भा गए थे और उन्होंने पहली ही नजर में फैसला कर लिया था कि शादी इन्ही से करेंगी। सुषमा जी के माता-पिता इस शादी के लिए रादी नही थे तो घरवालों से खिलाफ जाकर उन्होंने शादी कर ली। हालांकि घरवाले बाद में मान गए थे और बाद में कौशल जी सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील बने।

सुषमा स्वराज का राजनीति करियर | Sushma Swaraj in Politician

Sushma Swaraj
Sushma Swaraj with Husband

एमरजेंसी के समय सुषमा जी सुर्खियों में आईं जब उन्होंने इसका विरोध प्रचार किया था। जुलाई, 1977 में उन्हें चौधरी देवीलाल की कैबिनेट में एक मंत्री बनाया गया। भाजपा लोकदल की हरियाणा में इस गठबंधन सरकार में वे शिक्षा मंत्री भी बनी। साल 1979 में 27 साल की उम्र में सुषमा जी जनता पार्टी की हरियाणा अध्यक्ष बनी थीं। फिर साल 1990 में सांसद बनी और साल 1990-96 तक वे राज्यसभा में कार्यरत रहीं। सुषमा जी दिवंगत अटल बिहारी बाजपेयी की कैबिनेट मंत्री रहीं। साल 1996 में 11वीं लोकसभा में अटल बिहारी बाजपेयी की तेरह दिनी सरकार में सुषमा जी सूचना प्रसारण मंत्री बनी। 12वीं लोरसभा के लिए वे फिर दक्षिण दिल्ली के लिए चुनी गईं और फिर से उन्हें सूचना प्रसारण मंत्री बनाया गया। अक्टूबर, 1998 में सुषमा स्वराज केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी और बाद में जब विधानसभा चुनाव हुए तो अपनी पार्टी से हार गईं तो वे राष्ट्रीय राजनीति में लौट आईं।

साल 1999 में सुषमा स्वराज ने आम चुनावों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बेल्लारी संसदीय क्षेत्र, कर्नाटक से चुनाव में हार गई थीं। साल 2000 में वे फिर से राज्यसभा पहुंची और सूचना प्रसारण मंत्री बन गई और साल 2004 में वे सरकार में रहीं। साल 2009 में मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनी गई सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में प्रतिपक्ष की उपनेता रही हैं। बाद में विदिशा से लोकसभा के लिए चुनी गईं और उन्हें लालकृष्ण आडवाणई की जगह पर नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। सुषमा स्वराज का नरेंद्र मोदी का खास नाता रहा है और वे मोदी जी को एक शक्तिशाली लीडर के रूप में देखती थीं। साल 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद उन्हें देश की पहली महिला विदेश मंत्री का दर्जा दिया गया। मगर साल 2019 वाले लोकसभा में जब उन्हें फिर से इसी पद पर कैबिनेट में ली जाने की बात आई तो उन्होंने स्वास्थ्य ठीक ना होने के कारण मना कर दिया था।



सुषमा स्वराज राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता, भाजपा की पहली महिला मुख्यमंत्री, पहली केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री, महासचिव, प्रवक्ता और नेता प्रतिपक्ष पदों पर कार्यरत रही हैं। वे भारतीय संसद में अकेली महिला सांसद हैं जिन्हें असाधारण सांसद का पुरस्कार दिया गया। इसके साथ ही भाजपा की एकमात्र नेता भी रही हैं जिन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत, दोनों से चुनाव लड़ा। सुषमा जी ने कई क्रांतिकारी रैलियों में भाग लिया और बीजेपी के सभी बड़े नेता से उनके मधुर संबंध थे लेकिन सभी उन्हें बड़ी या छोटी बहन के रूप में ही देखते थे। महिला नेता होकर भी सुषमा जी ने अपनी मर्यादा कभी नहीं पार की और भारतीय महिला होने के नाते अपने हर फर्ज अदा किये।

सुषमा स्वराज का निधन | Sushma Swaraj Death

नरेंद्र मोदी की सरकार में सुषमा जी को विशेष दर्जा प्राप्त रहा है। भाजपा के लिए उन्होंने बहुत से अच्छे काम किए और हृदय की वे उतनी ही कोमल और मधुर रही हैं। लोगों की मदद करना उनका स्वभाव था जो लोगों को उनके करीब कर देता था। सुषमा जी का भाजपा की हर महिला नेताओं से बहुत अच्छा संबंध रहा है और वे हमेशा दूसरों के बारे में पहले सोचने वाली महिला थीं। उनके निधन की खबर ने सभी को झकझोर दिया है और किसी को इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा। सुषमा स्वराज ने राजनैतिक कार्यकाल के दौरान अपना पूरा समर्पण दिया और भाजपा में उनका नाम भी दिग्गज नेताओं में लिया जाएगा। सुषमा जी व्यक्तिगत रूप से एक महान महिला थीं जो हर समय सिर्फ देश के प्रति अच्छी भावना रखती थीं। सुषमा स्वराज को जितना प्रेम देश से था उतना ही वे अपने पति और अपनी बेटी बंसूरी स्वराज से बहुत प्रेम करती थीं। उनके अचानक निधन से उनका परिवार टूट सा गया है और ये देखकर तमाम उनके चाहने वाले भी दुखी हैं।

सुषमा स्वराज का आखिरी ट्वीट | Last tweet of Sushma Swaraj

Sushma Swaraj
Sushma Swaraj

सुषमा जी ने अपना आखिरी ट्वीट 7 बजे के करीब किया था। उसमें उन्होंने लिखा था, ”प्रधान मंत्री जी – आपका हार्दिक अभिनन्दन. मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।”  देखिए ट्वीट-

प्रधान मंत्री जी – आपका हार्दिक अभिनन्दन. मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी. @narendramodi ji – Thank you Prime Minister. Thank you very much. I was waiting to see this day in my lifetime.



इस ट्वीट के कुछ समय बाद ही उन्हें हार्ट अटैक आया और वे हम सबको छोड़कर चली गईं। इसी के साथ एक नारी पराक्रम युग का अंत हो गया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे, हम सबकी यही प्रार्थना है।

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