Kargil Vijay Diwas के ऐतिहासिक दिन को बयां करती हैं ये 12 अनदेखी तस्वीरें

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साल 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध (Kargil War) हुआ था और इस दौरान बहुत से जवानों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिये थे। ऑपरेशन विजय के नाम से प्रसिद्ध हुआ कारगिल युद्ध भारत के लिए पाकिस्तान के खिलाफ मिली सैन्य, राजनीतिक और कूटनीति की जीत थी। इस साल 26 जुलाई को इस युद्ध में शहीद हुए 10 भारतीय सैनिकों की याद में भारतीय सेना विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) मनाती है। साल 1971 के बाद से ही पाकिस्तान ताक लगाए बैठा था कि वो भारत पर फिर से हमला कर दे और इस बार जीत हासिल कर ले लेकिन ऐसा हुआ नहीं क्योंकि भारत की जांबाज सेना ने पाकिस्तान को धूल चटा दी थी।

आज हम आपको आपको भारतीय सेना की इस शौर्यगाथा का एक अध्याय बने उस युद्ध के बारे में 12 अनसुनी बातें बताएंगे और इसके साथ ही Kargil War से जुड़ी 10 अनदेखी तस्वीरें भी दिखाएंगे। इन्हें देखकर और इनके बारे में जानकर आपको अपने आप में गर्व महसूस होगा।

कारगिल युद्ध

साल 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ ये युद्ध लद्दाख के कारगिल इलाके में लड़ा गया था और इससे पहले ये बाल्टिस्तान का हिस्सा था जो कश्मीर में पहले युद्ध के बाद LOC से अलग कर दिया गया था।

कारगिल युद्ध

साल 1971 में बांग्लादेश के गठन के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच पहला युद्ध हुआ था। वो जंग भी पाकिस्तान को हार का मुंह देखना पड़ा था और फिर साल 1999 में भी पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा था। मगर हमने अपने कई जवानों को खोया था इसके लिए देश आज भी उनका एहसानमंद है।

कारगिल युद्ध

भारतीय सेना ने घुसपैठ करके भारतीय सीमा में गए थे और पाकिस्तानी सैनिकों और कश्मीरी आतंकियों को खदेड़ तक भगाने के लिए ऑपरेशन विजय लॉन्च किया गया था। कारगिल युद्ध के दौरान केंद्र में एनडीए की सरकार थी और इसे पीएम अटल बिहारी वाजपेयी लीड कर रहे थे।

कारगिल युद्ध

कारगिल युद्ध इस वजह से हुआ था क्योंकि पाकिस्तान द्वारा शिमला समझौता होना था और उसने इसका उल्लंघन किया था। इसमें दोनों देशों के बीच एक नियंत्रण रेखा के पास सशस्त्र युद्ध ना लड़ने पर सहमति बन गई थी। मगर पाकिस्तान नहीं माना और भारतीय सेना को कई नए-नए हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ा था।

कारगिल युद्ध

इस युद्ध में भारतीय वायुसेना ने सफेद सागर नाम का एक ऑपरेशन चलाया था और इससे पहले ये मौका जब 32000 फीट की ऊंचाई पर वायुसेना ने ऐसे किसी ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इसके लिए कुछ इंजीनियर्स को सिर्फ 1 हफ्ते के लिए ही ट्रेनिंग दी गई थी। ये तस्वीर शहीद विक्रम बत्रा की है जिन्होंने बहुत ही जांबाजी के साथ जंग लड़ी थी।

कारगिल युद्ध

वैसे तो तत्कालीन पीएम अटल बीहारी वाजपेयी ने ऑपरेशन विजय 14 जुलाई को सफल घोषित हो गया था लेकिन इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि 22 जुलाई को इस ऑपरेशन को बंद करके की गई थी। ये यान उसी दौरान बाहर निकाला गया था जो ध्वस्त हो गया था।

कारगिल युद्ध

कारगिल युद्ध में जीत हासिल करने के बाद भारतीय सेना तिरंगा लहराते हुए। जो जवान जहां था वहीं उन्होंने भारत माता की जय के नारे लगाए। इस युद्ध में भारत के करीब 527 जवान शहीद हो गए थे और इनकी याद में भारतीय सेना ने जम्मू कश्मीर के द्रास में एक वॉर मेमोरियल बनाया था जिसमें शहीदों के नाम अंकित किए गए थे।

कारगिल युद्ध

कारगिल युद्ध की लड़ाई पहाड़ी क्षेत्र में हुई थी और ये अब तक का सबसे खतरनाक युद्ध माना जाता है। इस तरह के इलाके में जाकर युद्ध करना आसान नहीं होता है। ये जगह वहीं की है जहां आज कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों को इस तरह से श्रद्धांजलि दी गई थी।

कारगिल युद्ध

कारगिल युद्ध में परमाणु शस्त्र रखने वाले दो देशों के बीच पहला युद्ध हुआ था और इसके साथ ही ये पहला ऐसा युद्ध था जिसकी मीडिया कवरेज की गई थी। उस दौरान शहीद अनुज नय्यर ने अपनी जान पर खेलकर कई अहम कदम उठाए थे। इनके शहीद होने पर सैनिकों का हौसला कुछ हद तक कम हो गया था लेकिन विजय हासिल करने के आस ने उन्हें फिर से लड़ने की हिम्मत दी।

कारगिल युद्ध

कारगिल युद्ध के दौरान एयरफोर्स के बीच एक खास बातचीत हुई थी जिसे आपने फिल्म बॉर्डर में देखा होगा। दरअसल एयरफोर्स पूरी तरह से तैयार थी कि जब भी भारतीय सेना का हौसला कमजोर होगा तो वे अपनी फोर्स लेकर हमला करेंगे और इस दौरान उनकी जरूरत पड़ी भी थी लेकिन जीत भारत की ही हुई।

Kargil War in 1999

साल 1999 में नरेंद्र मोदी भारतीय सेना की जीत के बाद कश्मीर पहुंचे थे और वहां सैनिकों की बहादुरी और कुछ शहीद जवानों के जज्बे को सलाम किया था। उस समय नरेंद्र मोदी बीजेपी के एक नेता थे और गुजरात से बीजेपी का नेतृत्व कर रहे थे। इसके दो साल बाद ही वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। इस तस्वीर को नरेंद्र मोदी ने शेयर की।

Kargil War in 1999

कारगिल वॉर के समय 2000 फाइटर पायलट्स को तैयार किया गया था क्योंकि लड़ाई के दौारान उनकी जरूरत पड़ सकती थी।

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