World Brain Day: तन और मन के साथ मस्तिष्क को समझना क्यों है जरूरी?

एक आंकड़े के मुताबिक, बीते समय भारत में स्ट्रोक से जूझने वाले मरीज़ों की संख्या 100 फ़ीसदी से भी अधिक हो गई थी। कोविड-19 महामारी के इस दौर में मस्तिष्क संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों की स्थितियों और इलाज की प्रक्रिया पर बहुत प्रभाव पड़ा है, लॉकडाउन के दौरान तनाव व अवसाद के मामलों में भी बहुत इज़ाफ़ा हुआ है, इनपर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। 22 जुलाई को World Brain Day मनाया जाता है इस मौके पर जानिए एस्पर्ट्स क्या कहते हैं?



World Brain Day पर जानिए विशेषज्ञों की राय

धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ अमित श्रीवास्तव ने बताया कि ब्रेन को स्वस्थ रखें। मस्तिष्क के सन्दर्भ में यदि आहार की बात हो तो अक्सर सिर्फ ड्राई फ्रूट खाने की सलाह दी जाती है लेकिन मस्तिष्क के विकास के मामले में अन्य भी ऐसे पदार्थ हैं जिनसे इसको पोषण मिलता है। सबसे पहले याद रखें एंटी ऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थ लें, इनमें अंगूर, ब्लू बेरीज़, शकरकंद हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, मछली आदि शामिल हैं। अपने मस्तिष्क के स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य से अलग न समझें, इसका ख्याल रखें। साथ ही भरपूर व्यायाम करें, शरीर का रक्तचाप सामान्य रखने का प्रयास करें और खुशनुमा माहौल बनाकर रखें।

World Brain Day
World Brain Day

नारायणा अस्पताल के कंसल्टेंट डॉ साहिल कोहली ने बताया कि कोविड संक्रमण के दौर में खास तौर पर इसके लक्षणों को मसहूस करके कोविड की जांच के लिए लोग जाते हैं, लेकिन अध्ययनों के हिसाब से तकरीबन आधे मरीज़ों को न्यूरोलॉजी संबंधी लक्षण होते हैं, जो कि कोविड के लक्षणों से पहले भी देखे जा सकते हैं जैसे स्वाद या महक न आना बीमारी के रूप में स्वाद न महसूस कर पाने को डिस्ग्युज़िया और महक न आने को एनोस्मिया कहते हैं, विडम्बना है कि ये दोनों कोविड के शुरूआती लक्षण भी हो सकते हैं।

श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट के सीनियर कंसलटेंट डॉ राजुल अग्रवाल ने World Brain Day पर बताया कि गौर करने वाली बात है कि  मस्तिष्क स्वास्थ्य संबंधी सीमित जानकारी और इलाज प्रक्रियाओं का अधिकतर प्रसार ही जटिल और जोखिम भरी प्रक्रिया के रूप में हुआ है। लेकिन तथ्य यह भी है कि इसके इलाज के तरीकों में इतनी आधुनिकताएँ आईं हैं जिन्होंने इलाज सुगम और आसान बनाया है। बीते समय भारत और जापान के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसे मशीन टूल को खोजा जिसके ज़रिये ग्लायोमा ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे मरीज़ों के इलाज की सही दिशा निर्धारित करने में मदद मिलेगी, यह अपने आप बहुत बड़ी उपलब्धि है। और इसी तरह शोध और प्रयोग जारी हैं जिसके परिणाम हमारे सामने आते जा रहे हैं।



साथ ही ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी का यदि ज़िक्र करें तो कई इलाज ऐसे भी उपलब्ध हैं, जिनसे सर्जरी तक की भी नौबत नहीं आती, बल्कि कई ट्यूमर्स को खाने वाली दवाओं के ज़रिये नियंन्त्रण में किया जा सकता है, और उन्ही मेडिकेशन व हिदायतों के साथ व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। लेकिन अभी भी समस्या लोगों का भय और जागरूकता के अभाव में इस विषय में दिलचस्पी न लेना, बीमारियों को नज़रअंदाज़ करना, साथ ही अन्य शारीरिक बीमारियों के मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव को नज़रअंदाज़ करना है। याद रखें मस्तिष्क के विषय में “देर करना” इलाज को जटिल और जोखिम भरा बना देता है।

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