आधी रात को शमशान क्यों जाते थे ओशो (Osho)? जानें इसका रहस्य



भारत देश में अलग-अलग धर्मगुरु आए लेकिन ‘ओशो’ की विचारधारा का मुकाबला आज तक कोई नहीं कर पाया. ओशो कौन थे ऐसा प्रश्न हर किसी के मन में आया लेकिन असल में कोई भी उन्हें समझ नहीं पाया. कोई उन्हें धर्मगुरु कहता तो कोई उन्हें दार्शनिक मानता था ,लेकिन इसके अलावा उन्हें कुछ लोग ग्रेट थिंकर मानते थे, तो कई लोग उन्हें सेक्स गुरु भी कहते थे. ओशो अपनी तर्कधारा से सही को गलत और गलत को सही साबित करने का हुनर रखते थे. चलिए बताते हैं, Who was Osho Rajneesh और ओशो के जीवन से जुडी (Osho Hindi) कुछ रहस्यमयी और दिलचस्प बातें.

कौन थे ओशो रजनीत? | Who was Osho Rajneesh

Who was Osho Rajneesh
फोटो क्रेडिट: TOI

11 दिसंबर, 1938 को Osho Rajneesh का जन्म मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के एक छोटे से गांव कुचवाड़ा में हुआ था. इनके पिता बाबूलाल और माता सरस्वती जैन के 11 बच्चे थे जिनमें से ओशो सबसे बड़े बेटे थे. इनका असली नाम चंद्र मोहन जैन था और इनके पिता एक कपड़ा व्यापारी थे. ओशो की प्रारंभिक बचपन अपने दाद और दादी के साथ बिताया था और उनके साथ रहकर ओशो काफी स्वतंत्र रहते थे. उन्होंने भविष्य के जीवन पर एक प्रभाव जालती है और शुरुआती जीवन के अनुभवों को श्रेय दिया.

ओशो की शिक्षा | Education of Osho

ओशो अपने बचपन से ही सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रश्न पूछते रहते थे. जबलपुर के हितकारिणी कॉलेज में जब वे अध्ययन कर रहे थे, तब उन्होंने कॉलेज के प्रशिक्षक से बहस की जिसके कारण उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया. साल 1955 में डीएन जैन कॉलेज से इन्होंने स्नातक किया और लोगों को भाषण देने का काम भी करते थे, इसके बाद साल 1957 में इन्होंने यूनिवर्सिटी से फिलोसॉफी में डिस्टिंक्शन के साथ परास्नातक भी किया.

Osho आधी रात शमशान क्यों जाते थे?

कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसा बताया जाता है कि जब ओशो 12 साल के थे तब शमशान ये जानने के लिए कि मौत के बाद लोग कहां जाते हैं. इनके माता-पिता काफी चिंतित रहने लगे थे. जब उन्होंने ओशो का भविष्य एक ज्योतिष से पूछा तो उन्होंने कहा कि 14 साल की उम्र शुरू होने के बाद  7 दिनों के बीच इनकी मौत हो सकती है. ओशो ने 7 दिन एक मंदिर में बैठकर अपनी मौत का इंतजार किया. ये बात उनके मन में हमेशा के लिए बैठ गई थी कि जब वे मरेंगे तो वे जानना चाहेंगे कि मरने के बाद क्या वही सब होता है जो हमने किताबों में पढ़ी है? जब वे नहीं मरे तो वे हर रात शमशान जाकर वहां भटकती आत्माओं से पूछना चाहते थे कि वे मरकर कहां गए या यहीं तो भटक क्यों रहे. खबरों के मुताबिक उन्होंने ऐसा कई सालों तक किया था.



ओशो का करियर | Career of Osho

किशोर अवस्था में ओशो एक विद्रोही युवा बनकर सामने आए और समाज के मौजूदा धर्मों, संस्कृतियों या समाज पर कई सवाल भी उठाएष ओशो सर्व धर्म सम्मेलन में सार्वजनिक रूप से बोलने में दिलचस्पी रखते थे और हर बार अपने विचार व्यक्त करते रहते थे. 21 साल की उम्र में वे रहस्यमयी तरीके से अध्यात्मिक ज्ञान के अनभव होने का दावा करते थे और उसी के कारण उन्होंने अपनी नौकरी भी छोड़ दी थी.

साल 1958 में जबलपुर यूनिवर्सिटी में वे दर्शनशास्त्र के लेक्चरर थे लेकिन बाद में उनके पद को प्रमोट करते हुए उन्हें ट्रांसफर कर दिया था क्योंकि उनके द्वारा पढ़ाए जाने की नीति यूनिवर्सिटी को समझ नहीं आई. शिक्षक होने के दौरान उन्हें लोग आचार्य रजनीश कहकर पुलाते थे. दर्शन शास्त्र पढ़ाने के साथ ही इन्होने भारत का भ्रमण करना शुरु कर दिया और गांधी व समाजवाद पर भाषण भी देते थे.

श्री रजनीश आश्रम की स्थापना- Osho International Meditation Resort

साल 1962 में ओशो का पहला शिविर लगा था और दो सालों के बाद इन्होंने नौकरी छोड़ ध्यान के मार्ग पर चलने का फैसला लिया. साल 1964 में रणकपुर शिविर में इनका पहला प्रवचन रिकॉर्ड हुआ खा और इनकी किताब ‘Path to Self-Rajneesh’ छपी थी जो पूरे भारत में खूब प्रसिद्ध हुई. साल 1969 में ओशो के अनुयायियों ने उनके नाम का एक फाउंडेशन बनाया जिसका मुख्यालय मुंबई में था और बाद में इसे पूणे को करेगांव पार्क में शिफ्ट किया गया. ‘ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिसॉर्ट’ के नाम पर उस सेंटर को जाना जाता है और साल 1971 में उन्हें भगवान श्री रजनीश कहा जाने लगा था, उनका पूरा जीवन आश्रम में ही बीता और हर सुबह वे 90 मिनट का प्रवचन देते थे.

लगातार 15 सालों तक उन्होंने प्रवचन दिया और साल 1981 में करीब साढ़े तीन सालों के लिए वे सार्वजनिक रूप से मौन हो गए. मगर साल 1984 में वे एक बार फिर प्रवचन देने लगे और साल 1985 में विश्व भ्रमण के लिए निकले लेकिन कई देशों ने उन्हें अनुमति नहीं दी. साल 1986 में वे वापस लौट आए और साल 1987 में फिर प्रवचन देने लगे. साल 1989 में उन्होंने अपना नाम ओशो रखा और उनके मुताबिक जीवन में प्रेम, ध्यान और हास्य प्रमुख रूप से अनमोल है. प्रबोध एक सामान्य अवस्था है जिस्म सभी मानव जीते हैं. ओशो के मुताबिक इंसान भावनात्मक बंधनों के कारण खुद को पहचान नहीं पाता है और उसे अपने अंदर छिपी चीजों की समझ नहीं हो पाती.



ओशो से जुड़ी कुछ और बातें | Lesser Known facts about Osho

1. ओशो शिक्षक होने के साथ ही पूरे भारत के राज्यों में आचार्य रजनीश के नाम से अध्यात्मिक भाषण दिया. उन्होंने समाजवाद का विरोध किया और महसूस किया कि भारत मात्र पूंजीवाद, विज्ञान, प्रोद्योगिकी और जन्म नियंत्रण के माध्यम से समृद्ध हो सकता है.

2. ओशो ने अपने भाषण में कई प्रकार के मुद्दों को उठाया जिनमें रूढ़िवादी, भारतीय धर्म और अनुष्ठान हैं. उन्होंने कहा सेक्स अध्यात्मिक विकास को प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम है. इस भाषण की खूब आलोचना हुई थी.

3. जहां एक तरह ओशो की आलोचना होने लगी वहीं दूसरी ओर लोग उनके खुलेपन से प्रभावित भी होने लगे. इस तरह उन्होने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया.

4. साल 1960 तक ओशो धर्मगुरु बन गए थे और लोगों को दीक्षा भी देने लगे थे. साल 1970 में उन्हें हिंदू नेताओं ने भारतीय प्रेस द्वारा सेक्स गुरु का नाम दे दिया था.

5. ओशो के प्रवचन को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एकत्र किया जाता है जो 600 से अधिक खंडों मं प्रकाशित और 50 भाषाओं में अनुवादित हैं. उनके समुदाय में चिकित्सा समूह ने दुनियाभर के चिकित्सकों को भी आकर्षित किया है.

6. ओशो के लाखों-करोड़ों अनुयायी थे जिनमें से बॉलीवुड एक्टर विनोद खन्ना भी एक थे. विनोद खन्ना ने साल 1984 के समय अमेरिका में जाकर इनसे दीक्षा ली थी और अपने फिल्मी करियर को छोड़ दिया था. मगर ओशो ने इन्हें समझाया और एक साल के बाद वे अपने सांसारिक जीवन में लौट आए.

ओशो से जुड़े विवाद | Osho Controversy

साल 1980 मे ओशो के आश्रम और स्थानीय सरकारी समुदाय के बीच कुछ तनाव हो गया था. ऐसी बातें सामने आईं कि आश्रम के सदस्य वायरटैपिंग से मतदाता धोखाधड़ी और आग लगने से लेकर हत्या के लिए भी गंभीर आरोप शामिल हुए. आश्रम के कई नेता पुलिस से बचने के लिए भाग गए. ओशो ने भी संयुक्त राज्य अमेरिका से भागने की कोशिस की लेकिन साल 1985 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. ओशो पर जुर्माना लगाया गया और यूएसए छोड़ने का ऑर्डर दिया गया. अगले कई महीनों में ओशो ने नेपाल, आयरलैंड, उरुग्वे और जमैका सहित दुनिया भर के कई देशों में यात्रा की लेकिन उन्हें लंबे समय तक किसी भी देश में रहने की परमिशन नहीं थी. ओशो को गतिशील मध्यस्था की तकनीक पेश करने को श्रेय देता है जो असहनीय है.



ओशो ने वास्को काउंटी, ओरेगन में एक समुदाय बनाया, जिसे साल 1980 में रजनीशपुरम कहा गया. अपने शिष्यों के साथ काम करते हुए ओशो ने आर्थिक रूप से अस्थिर जमीन के विशाल एकड़ को एक संपन्न समुदाय बना दिया था. इसमें सामान्य शहरी आधारभूत संरचना जैसे अग्नि विभाग, पुलिस, रेस्टोरेंट, मॉल और टाउनहाउस शामिल थे. इसके अलावा ओशो सेक्स पर भी काफी खुलकर बात करते थे इसलिए कुछ लोग उन्हें सेक्स गुरु भी कहते थे जबकि उनके मुताबिक, इंसान के जीवन में सेक्स की सबसे बड़ी जरूरत होती है और हर कोई शादी भी इसलिए ही करता है लेकिन कोई इस बारे में बात नहीं करना चाहता. माँ आनंद शीला ओशो की अनुयायी थी और उन्होंने कई किताबें ओशो के ऊपर लिखी हैं जिनमें तरह-तरह के खुलासे किये हैं, वो (ma anand sheela)ओशो के आश्रम के कार्य सम्हालती थी , और उनका कहना था की आश्रम और प्रवचनों में शारीरिक संबंधों की है अधिकतर बातें होती हैं , और ओशो के मुताबिक शारीरिक इच्छाओं को मारना कई नुक्सान करा सकता है |

ओशो की मृत्यु | Osho Seath Story

ओशो ने हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, सूफी, जैन जैसे कई धर्मों पर प्रवचन दिया और वे अक्सर यीशू, मीरा, नानक, कबीर, गौतम बुद्ध, दादू, रवींद्रनाथ टैगोर जैसे महापुरुषों के रहस्यों के बारे में प्रवचन देते थे. 58 साल की उम्र में यानी 19 जनवरी, 1990 में ओशो ने दुनिया को अलविदा कह दिया. आज भी देश-विदेश से उनके अनुयायी उनके आश्रम में ध्यान लगाने और रूपंतर्ण के लिए आते हैं. ओशो का पूणे वाला आश्रम(osho international meditation resort) आज भी चलता है,और लोग मानसिक स्थिरता के लिए आज भी यहां आते हैं. जो लोग ओशो के साथ रहा करते थे उनके सिखाए हुए कुछ गुरु हैं जो प्रवचन भी देते हैं और यहां मेडीटेशन सेंटर भी चलाते हैं. ओशो आचार्य रजनीश (acharya rajneesh) के नाम से भी जाने जाते हैं. ओशो को मानने वाले उन्हें युगपुरुष कहते थे जिन्होंने लोगों की मासिकता ही बदल दी.



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