Ayodhya Verdict: क्या था राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामला? जानिए सबकुछ यहां…

16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट से सारी दलीलें बंद हो गई हैं और हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्ष की तरफ से सभी दस्तावेज लेने बंद हो गए। 9 नवंबर के दिन चीफ जस्टिस Ranjan Gogoi ने अपनी 5 बेंच के साथ सुप्रीम कोर्ट में करीब 10.30 बजे से फैसला सुनाना शुरु किया। इसके बाद 11.30 बजे तक रामलला के हक में फैसला सामने आया। इसमें मुस्लिम बोर्ड के हक़ में 5 एकड़ जमीने देने के आदेश दिए गए और रामलला जमीन को हिंदू बोर्ड को सौंपा गया। तीन महीने के अंदर मंदिर बनाने के आदेश के साथ ही मुस्लिम को जमीने देने के आदेश भी यूपी सरकार को दिया दया। यहां हम आपको Ayodhya Verdict in Hindi के बारे में सारी जानकारी देंगे..



Ayodhya मामले में क्या रही पूरी प्रक्रिया? | Ayodhya Verdict in Hindi

इतिहास की बात करें तो ऐसा माना जाता है कि साल 1528 में अयोध्या (Ayodhya) में एक ऐसी जगह पर मस्जिद का निर्माण कराया गया जहां पर हिंदू के भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। ऐसा कहा जा रहा है कि मस्जिद मुगल बादशाह बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबर के सम्मान में बनवाया था इसके कारण इसे बाबरी मस्जिद कहा गया। इस विवाद को लेकर क्या आप पूरा मामला जानते हैं? राम मंदिर विवाद (Ayodhya Verdict in Hindi) में यहां हम आपको तारीखों में सारी जानकारी बता रहे हैं-

1853: हिंदुओं ने आरोप लगाया था कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ। इस मुद्दे पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहली हिंसा हुई।

1859: अंग्रेज सरकार ने तारों की एक बाड़ खड़ी करके विवादित भूमि के आंतरिक और बाहरी परिसर में मुस्लिमों और हिदुओं को अलग-अलग प्रार्थनाओं की इजाजत दे दी।

1885: Ayodhya मामला पहली बार अदालत में पहुंचा। महंत रघुबर दास ने फैजाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद से लगे एक राम मंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अपील दायर की।

23 दिसंबर 1949: भगवान राम की मूर्तियां इस विवादित मस्जिद में पाई गईं थीं। हिंदुओं के मुताबिक, भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुस्लिमों ने आरोप लगाया कि यहां पर किसी ने मूर्तियां रखी थी पहले से थी नहीं।

Ayodhya Verdict in Hindi
Ayodhya Verdict in Hindi

16 जनवरी 1950: गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में एक अपील दायर की गई कि रामलला की पूजा-अर्चना की विशेष इजाजत दी जाए और उन्होंने वहां से मूर्ति हटाने पर न्यायिक रोक की भी मांग की थी।

5 दिसंबर 1950: महंत परमहंस रामचंद्र दास ने हिंदू प्रार्थनाएं जारी रखने और बाबरी मस्जिद में राममूर्ति को रखने के लिए मुकदमा दर्ज किया। इसके अलावा मस्जिद को ‘ढांचा’ नाम दिया था।

17 दिसंबर 1959: निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दर्ज कराय था।

18 दिसंबर 1961: उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया था।

1984: विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने और राम जन्मस्थान को स्वतंत्र कराने और एक विशाल मंदिर बनाने का अभियान शुरू किया। इसके लिए एक समिति का गठन भी किया गया।

1 फरवरी 1986: फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिदुओं को पूजा की इजाजत दे दी थी। ताले दोबारा खोले गए और नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी का गठन कर दिया था।



1 जुलाई 1989: भगवान रामलला विराजमान नाम से पांचवा मुकदमा दाखिल हुआ।

9 नवंबर 1989: उस दौर के प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की अनुमति दे दी थी।

25 सितंबर 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली। इसके बाद कई जगह सांप्रदायिक दंगे भी हुए।

नवंबर 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया। बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया। सिंह ने लेफ्ट संगठनों और बीजेपी के समर्थन से सरकार बनाई थी। बीजेपी के समर्थन वापस लेने के बाद वीपी सिंह ने इस्तीफा दे दिया।

Ayodhya Verdict in Hindi
Ayodhya Verdict in Hindi

अक्टूबर 1991: उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार ने बाबरी मस्जिद के आस-पास की 2.77 एकड़ भूमि को अपने अधिकार में ले लिया।

6 दिसंबर 1992: हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी ढांचा गिराया था, इसके बाद सांप्रदायिक दंगे होने लगे थे। जल्दबाजी में एक अस्थाई राम मंदिर बनाया गया और प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने मस्जिद के पुनर्निर्माण का वादा किया।

16 दिसंबर 1992: ढांचे की तोड़-फोड़ की जिम्मेदार स्थितियों की जांच के लिए एमएस लिब्रहान आयोग का गठन हुआ था।

जनवरी 2002: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यालय में एक Ayodhya विभाग शुरू किया था। इस विभाग का काम विवाद को सुलझाने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों से बातचीत करना मात्र रहा।

अप्रैल 2002: Ayodhya के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।

मार्च-अगस्त 2003: इलाहबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की गई थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का दावा था कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले लेकिन मुस्लिमों में इसे लेकर अलग-अलग मतभेद रहे हैं।

जुलाई, 2005: संदिग्ध इस्लामी आतंकवादियों ने विस्फोटकों से भरी एक जीप का इस्तेमाल किया था और यहां हमला भी हुआ। सुरक्षा बलों ने पांच आतंकवादियों को मार दिया था।

जुलाई, 2009: लिब्रहान आयोग ने गठन के ठीक 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

28 सितंबर, 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी और फैसले को साफ किया गया था।



30 सितंबर, 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाकर विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया था। इसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़े को मिला था।

9 मई, 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई थी।

19 अप्रैल, 2017: सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर बाबरी मस्जिद गिराने के लिए उकसाने वाले लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित सात नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया था।

5 दिसंबर, 2017: राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में शुरू की गई थी।

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