शुरुआती समय में संघर्ष के बाद इस तरह पलटी थी Amitabh Bachchan की किस्मत

साल 1913 में भारतीय सिनेमा की शुरुआत हुई और इसे दादा साहेब फाल्के ने शुरु किया था। धीरे-धीरे आधुनिकता फिल्मों में दिखने लगी और इंडस्ट्री भारत में अलग-अलग भाषाओं में बंट गई लेकिन सबसे पहले यहां हिंदी सिनेमा का ही जन्म हुआ था। इसके बाद साल 1969 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड की शुरुआत हुई और इसे हर साल उन सितारों को दिया जाने लगा जिन्होंने फिल्मों में अपना एक अद्भुत योगदान दिया। अब बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान ‘दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड’ से नवाजा जाएगा।



अमिताभ बच्चन बॉलीवुड के सबसे सफल और आज भी काम करने वाले अभिनेता हैं और उन्होंने अपने जीवन में अच्छे और बुरे दोनों दिन देखे हैं। इसके अलावा उन्होने मौत की दहलीज पर जाकर भी वापसी की और उनका पुनर्जन्म हुआ। यहां हम आपको Amitabh Bachchan Biography बताने जा रहे हैं, जिसे अमिताभ बच्चन के हर फैंस को पढ़ना चाहिए।

अमिताभ बच्चन का प्रारंभिक जीवन | Amitabh Bachchan Biography

11 अक्टूबर, 1942 को यूपी के इलाहाबाद में अमिताभ बच्चन का जन्म हुआ था। इनके पिता हरिवंश राय बच्चन प्रसिद्ध कवि थे और इनकी मां तेजी बच्चन एक समाजसेविका थीं। अमिताभ बच्चन के चेहरे और हाव-भाव के देखकर उनके पिता ने अमिताभ का नाम इंकलाब रखा था लेकिन बाद में हरिवंशराय बच्चन की साथी कवियित्री सुमित्रानंद पंथ ने अपनी पसंद का नाम अमिताभ दिया। फिर अमिताभ के छोटे भाई हुए जिनका नाम अजिताभ रखा गया। सही मायने में इनका सरनेम श्रीवास्तव था लेकिन इनके पिता ने इसको बदलकर बच्चन कर दिया। अमिताभ बच्चन एक समय में कुछ भी नहीं थे लेकिन आज अमिताभ बच्चन के ऑटोग्राफ के लिए लोग परेशान रहते हैं।

Amitabh Bachchan Biography
अमिताभ बच्चन के माता-पिता

Amitabh Bachchan की शुरुआती पढ़ाई नैनिताल के शेरवुड स्कूल से हुई और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के करोरीमल कॉलेज से इन्होंने आर्ट्स में मास्टर्स किए थे। कॉलेज के दिनों में वे दिलीप कुमार की फिल्में देखते थे तो उनका मन एक्टिंग करने का होता था लेकिन उनके पिता ऐसा नहीं चाहते थे। हरिवंशराय बच्चन चाहते थे कि वो कोई सरकारी नौकरी करे और जिंदगी सेट कर ले लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अमिताभ बच्चन को अपने पिता की लिखी ‘मधुशाला’ कविता बहुत पसंद है और अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज में मधुशाला रिकॉर्ड किया था।

अमिताभ बच्चन का निजी जीवन | Amitabh Bachchan Personal Life

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अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन भादुड़ी

अमिताभ बच्चन ने पहली बार जया बच्चन (Jaya Bachchan) को फिल्म जंजीर के सेट पर देखा था। उन्हें देखते ही अमिताभ बच्चन तो नहीं लेकिन उनके माता-पिता को जया काफी पसंद आ गई थी। अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म करने के दौरान वे जया से बात कर लेते थे लेकिन शादी का ख्याल उनके मन में नहीं आया। फिर एक किस्सा बिग बी ने अपने ब्लॉग में लिखा था। अमित जी लिखते हैं, ‘मैंने अपने दोस्तों से वादा किया था कि अगर जंजीर हिट हुई तो मैं उन्हें लंदन घुमाऊंगा जिसमें जंजीर की कुछ कास्ट भी थी। मैंने अपने पिता से पूछा कि मुझे जाना है तो उन्होंने पूछा कौन-कौन जा रहा है तो मैंने सबके नाम बताए जिसमें जया भादुड़ी का नाम भी था। इतना सुनने के बाद पिताजी ने कहा लड़की भी साथ जाएगी तो तुम्हे उससे शादी करनी होगी।’ इसी कड़ी में अमिता बच्चन ने ब्लॉग में आगे लिखा, ‘पहले तो मैंने खूब आनाकानी की लेकिन लंदन जाने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। मैंने सोचा शादी तो करनी ही है अभी कर लेता हूं। फिर उन्होंने हां कही और हमारी शादी झटपट हो गई।’ जया बच्चन ने दो बच्चों श्वेता और अभिषेक बच्चन को जन्म दिया । अभिषेक बच्चन की शादी पूर्व मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या राय से और श्वेता की शादी दिल्ली के मशहूर बिजनेसमैन नंदा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री के बेटे से हुई।

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अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और रेखा, फिल्म सिलसिला

Amitabh Bachchan का पहला क्रश वहिदा रहमान थी और इसका जिक्र वे अक्सर करते रहते हैं। अमित ने उनके साथ फिल्म रेश्मा और शेरा में काम किया था, इसके अलावा उन्होंने फिल्म कूली में भी साथ काम किया। अमिताभ बच्चन को उनकी को-स्टार परवीन बॉबी बहुत पसंद थी और उन दिनों उनका नाम परवीन के साथ खूब जोड़ा गया था लेकिन अक्सर उनके अफेयर्स के किस्सों पर जया बच्चन ब्रेक लगाती थीं। इसी दौरान साल 1973 में आई फिल्म नमक हराम के सेट पर अमिताभ की मुलाकात रेखा से हुई और फिर बाद में दोनों ने मिस्टर नटवरलाल, दो अंजाने, सुहाग, मुकद्दर का सिकंदर, गंगा की सौगंध, इमान धर्म, अलाप, चश्मेबद्दूर, सूरमा भोपाली, जानी दोस्त, खून पसीना, कसमें वादे और सिलसिला जैसी फिल्मों में काम किया।



फिल्म सिलसिला अमिताभ और रेखा की साथ में आखिरी थी क्योंकि इस फिल्म को जया और रेखा ने सिर्फ यश चोपड़ा के लिए किया था। इस फिल्म की कहानी अमिताभ बच्चन और रेखा की प्रेमकहानी की असलियत को दर्शाती है। इसके बाद अमिताभ बच्चन ने ना तो कभी रेखा से बात की और ना ही कभी उनके साथ फिल्म की। मगर आज भी अमिताभ बच्चन और रेखा की प्रेमकहानी के चर्चे होते हैं। इसके अलावा अमिताभ बच्चन वहिदा रहमान को बहुत पसंद करते थे। वहीदा रहमान अमित जी की फेवरेट एक्ट्रेस थीं। फिलहाल अमिताभ बच्चन अपने परिवार के साथ एक खुशहाल जीवन बिता रहे हैं।

अमिताभ बच्चन का शुरुआती करियर (Amitabh Bachchan Early career)

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फिल्म जंजीर

अमिताभ बच्चन दिल्ली से नौकरी करने कलकत्ता गए और यहां पर यहां पर इन्होंने नौकरी की । यहां पर काम करने के दौरान भी अमिताभ के सपने एक्टर बनने के ही थे। उन्होंने अपनी पहली सैलरी से एक फोटोशूट करवाया और उसे एक ऑडिशन में दिया लेकिन उस तस्वीर को रिजेक्ट कर दी गई क्योंकि उनकी टांगे काफी लंबी थी। इसके बाद अमिताभ बच्चन ने सोच लिया कि वे शायद एक्टिंग के लिए नहीं बने हैं। इसी बीच अमिताभ बच्चन के भाई अजिताभ को पता चला कि ख्वाजा अहमद अब्बास अपनी फिल्म सात हिंदुस्तानी के लिए कास्ट ढूंढ रहे हैं तो अजिताभ ने भाई की सारी तस्वीरें उन्हें भेज दी।



फिर अमिताभ बच्चन को फिल्म के ऑडिशन में पास कर दिया गया और उन्हें एक मुस्लिम लड़के का किरदार मिला, मगर फिल्म मेकर को नहीं पता था कि ये प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय के बेटे हैं। उन्होंने अमिताभ नाम का मतलब पूछा तो उन्होंने बताया कि अमिताभ का अर्थ सूर्य और यह गौतम बुद्ध का भी एक नाम है। अब्बास ने अमिताभ को साफ कह दिया कि वे इस फिल्म में उन्हें 5 हजार रुपये फीस देंगे और इससे ज्यादा नहीं दे पाएंगे। इसके बाद जब अब्बास को उनके पिता का नाम पता चला तो उन्होंने कहा कि वे अमिताभ के पिता से पूछकर ही उन्हें काम देंगे। बाद में हरिवंशराय बच्चन तक सूचना गई और उन्होने हामी भर गई, फिल्म बनी और साल 1969 में रिलीज हुई।

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अमिताभ बच्चन

फिल्म सात हिंदुस्तानी का प्रीमियर मुंबई में हुआ जिसमें अब्बास ने उस समय की पॉपुलर एक्ट्रेस मीना कुमारी को भी बुलाया। फिल्म देखने के बाद उन्होने अमिताभ बच्चन की तारीफ की तो अमिताभ को शर्म आ गई थी। यहां से Amitabh Bachchan का संघर्ष शुरु हुआ और उन्हें मॉडलिंग के भी ऑफर मिले लेकिन वे मॉडलिंग नहीं करना चाहते थे। मगर सात हिंदुस्तानी फ्लॉप होने के कारण उन्हें काम नहीं मिल रहा था फिर वे वाइज ओवर करने लगे और एक प्रोग्राम के वे प्रति प्रोग्राम के 50 रुपये लेते थे। वर्ली री सिची बेकरी में 50 रुपये में कुछ बादाम और टोस्ट चाय मिल जाता था। कई रात और दिन उन्होंने इसी को खाकर गुजारे लेकिन अपने माता-पिता को इसका पता नहीं चलने दिया। हालांकि साल 1971 और साल 1972 में उनकी फिल्में आनंद और बॉम्बे टू गोवा आई लेकिन इनमें वे साइड एक्टर थे। एक दिन फिल्म मेकर प्रकाश मेहरा के ऑफिस से फोन आया जिसमें उन्हें फिल्म जंजीर के ऑडिशन के लिए बुलाया गया। दरअसल प्रकाश मेहरा फिल्म जंजीर के लिए पहले देव आनंद फिर राजेश खन्ना और फिर राज कुमार के साथ कॉन्टैेक्ट किया लेकिन किसी के पास डेट नहीं थी, तो अमिताभ बच्चन को फिल्म के लिए सिलेक्ट कर लिया गया।

Amitabh Bachchan Movies– फिल्म साल 1973 में रिलीज हुई और इसने सफलता के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। इंडस्ट्री को नया सुपरस्टार मिल चुका था और इसके बाद 70 और 80 के दशक में उन्होंने शोले, डॉन, मुकद्दर का सिकंदर, दीवार, सुहाग, कालिया, आखिरी रास्ता, नमक हलाल, तूफान, लावारिस, याराना, नसीब, शहंशाह, कूली, शराबी, गंगा यमुना सरस्वती, त्रिशूल, हेरा-फेरी, खून पसीना, कालिया, देस प्रेमी, अमर अकबर एन्थोनी, मिस्टर नटवरलाल कई सुपरहिट फिल्में दीं। इसके बाद 90 के दशक में उनकी कई सारी फिल्में आईं जिनमें से हम और आज का अर्जुन फिल्म ही हिट हो पाई। हालांकि 2000’s की शुरआत में और उसके बाद अमिताभ बच्चन की मोहब्बतें, कभी खुशी कभी गम, पा, चीनी कम, सूर्यवंशम (Sooryavansham), बदला, पीकू, बाग़बान, भूतनाथ जैसी फिल्मों में काम किया। उनकी आने वाली फिल्मों में ब्रह्मशास्त्र और कई दूसरे प्रोजेक्ट्स हैं। जब इनकी फिल्में चलने लगीं तो अमिताभ बच्चन से राजेश खन्ना काफी जलने लगे थे।

अमिताभ बच्चन का दूसरा जन्म (Second Birth of Amitabh Bachhan)

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अमिताभ बच्चन

साल 1983 में फिल्म कूली की शूटिंग के दौरान पुनित इस्सर के साथ एक फाइट सीन में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनकी आंतों में मेज धंस गई थी और उनकी जान बुरी तरह खतरे में आ गई थी। अमिताभ बच्चन को बैंगलुरू के अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में मुंबई में रिफर किया गया। 22 जुलाई से 2 अगस्त तक अमिताभ बच्चन की कई सर्जरी हुई जिसमें उन्होने अपनी एक किडनी भी खो दी। उस दौरान जब उनके लिए देशभर में दुवाओं का सिलसिला शुरु हुआ और अस्पताल के बाहर लोग भीड़ लगाकर रहते थे। जब सबको पता चला कि अमिताभ बच्चन की जान बचाने के लिए कई यूनिट ब्लड की जरूरत है तो पूरे भारत से उन्हें खून देने के लिए लोग आ गए थे। Amitabh Bachchan के लिए लोग अपने-अपने ढंग से दुआ मांगने लगे और अंत में अमिताभ बच्चन को होश आया और वे धीरे-धीरे ठीक हुए।



डॉक्टर्स के मुताबिक एक समय ऐसा आय़ा था कि डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था लेकिन फिर करिश्मा ही हुआ जिसमें वे बच गए। इसके बाद फिर अमिताभ बच्चन ने फिल्म की शूटिंग पूरी की और फिल्म साल 1984 में रिलीज हुई जिसने धूम मचा दी और ये ब्लॉकबस्ट साबित हुई थी। ऐसा बताया जाता है कि उन दिनों पुनीत इस्सर के लोग खून के प्यासे हो गए थे और वे मुंह छिपाकर घर से बाहर निकलते थे।

अमिताभ बच्चन की कंपनी का दीवाला

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अमिताभ बच्चन

90 के दशक में अमिताभ बच्चन की हर फिल्म फ्लॉप होने लगी। उन्होंने एक कंपनी भी खोली थी जिसका दीवाला निकल गया और उनके ऊपर करोड़ों का कर्ज हो गया था। उस समय अमिताभ बच्चन बहुत परेशानी में थे कि तभी उन्हें साल 2000 में क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति होस्ट करने का ऑफर आया। बिग बी कभी भी छोटे पर्दे पर काम नहीं करना चाहते थे लेकिन उनकी मजबूरी ऐसी थी कि उन्हें अपना घर निलाम होने से बचाना था और इसलिए हां कह दिया। शो शुरु हुआ और घर-घर में ये शो छा गया। साल 2000 से 2019 तक ये शो अमिताभ बच्चन के करियर का यू-टर्न निकला और उनका करियर एक बार फिर उफान पर आया और आज भी 76 साल की उम्र में वे दो-दो शिफ्ट में काम करते हैं। तब ऐसा बताया जा रहा था कि अमिताभ बच्चन शायद गलत मोर्चे का शिकार हो गए और वो अपने लक्ष्य से भटक गए।

अमिताभ बच्चन को मिला सम्मान | Amitabh Bachchan Awards

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अमिताभ बच्चन

Amitabh Bachchan को पा, ब्लैक और हम के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। साल 1991 में लाइफटाइम अचीवमेंट फिल्मफेयर मिला, मोहब्बतें, नमक हलाल के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए फिल्मफेयर, सुपरस्टार मिलेनियर फिल्मफेयर, साल 1984 में पद्मश्री, साल 2001 में पद्मभूषण, साल 2015 में पद्मविभूषण और पीकू, पा और ब्लैक के लिए नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। साल 2019 में अमिताभ बच्चन को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड देने की घोषणा हुई। इसके अलावा अमिताभ बच्चन ने स्टारस्क्रीन, स्टारडस्ट, स्क्रीन, आईफा, जी सिने जैसे कई अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री को 50 साल दिए और आज भी काम कर रहे हैं।

अमिताभ बच्चन और रानजीति | Amitabh Bachchan Politics

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अमिताभ बच्चन

साल 1984 में जब वे ठीक होकर घर आए तो उनके पास उनके गहरे मित्र और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी आए और उन्हें राजनीति ज्वाइन करने को कहा। अमिताभ बच्चन ने कांग्रेस ज्वाइन की लेकिन जब उनके मित्र राजीव गांधी की साल 1991 में हत्या कर दी गई तब वे राजनीति से दूर हो गए। उस समय उनका कहना था कि जिसके लिए राजनीति ज्वाइन की थी वो नहीं रहा तो मेरा यहां क्या काम। इसके बाद कई बार दूसरी-दूसरी पार्टी ने उन्हें राजनीति में लेना चाहा लेकिन अमिताभ बच्चन कभी वापस नहीं आए जबकि उनकी पत्नी जया बच्चन आज भी सांसद हैं।

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