आखिर क्यों साल में दो बार मनाया जाता है हनुमान दिवस? जानिए इसका रहस्य

अक्सर लोग हनुमान जन्मोत्वस को हनुमान जयंती के रूप में मनाते हैं लेकिन इस लेख के शीर्षक में हमने हनुमान दिवस का नाम दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी अमर हैं और वे आज भी इस कलयुग में मौजूद हैं। इसलिए उनके जन्मोत्वस को दिवस कहा जाता है क्योंकि जयंती उनकी मनाते हैं जो इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन हनुमान जी आज भी हम सबके बीच हैं और वे आदिकाल तक अमर हैं हिंदू धर्म में बजरंगबली का नाम सबसे सर्वपरी है और उन्हें हर कोई पूजता है। उनका नाम भर लेने से सारी विपदा और संकट से मुक्ति मिल जाती है। बजरंगबली को लोग अलग-अलग नामों से पुकारते हैं जैसे हनुमान जी, मारूतिनंदन, पवनपुत्र, अंजनी के लाल और संकटमोचन। आमतौर पर लोग किसी की जयंती (जिस दिन उनका जन्म हुआ) को साल में एक बार ही मनाते हैं लेकिन सिर्फ हनुमान जी ऐसे देवता हैं जिनका जन्मोंत्सव साल में दो बार मनाया जाता है।

पहला हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन यानी ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक मार्च या अप्रैल के बीच में और दूसरी बार कार्तिक के कृष्ण चतुर्दशी यानि नरक चतुर्दशी के दिन (सितंबर-अक्टूबर के बीच) मनाया जाता है। इसके अलावा तमिलनाडु और केरल में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष महीने की अमावस्या और उड़ीसा में वैशाख महीने के पहले दिन मनाया जाता है। मतलब जितने राज्य उनके हिसाब से अलग-अलग Hanuman Jayanti मनायी जाती है लेकिन इनमें से सही क्या है?

साल में दो बार क्यों मनाई जाती है हनुमान दिवस?

चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म सुबह 6.30 पर मेष लग्न और चित्रा नक्षत्र में एक गुफा के अंदर हुआ था। इसका मतलब साफ है कि उनका जन्म चैत्र महीने में हुआ था तो फिर चतुर्दर्शी को भी हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है। वाल्मिकी जी द्वारा लिखी गई रामायण के अनुसार, हनुमान जी का जन्म कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मंगलवार के दिन हुआ था, उस समय स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न लगा हुआ था. एक तिथि को विजय अभिनंदन महोत्वसव के रूप में मनाया जाता है जबकि जन्मदिवस को उसकी तिथि में मनाया जाता है। पहली तिथि के अनुसार, हनुमान जी सूर्य को फल समझकर खाने के लिए दौड़ गए थे, उसी दिन राहु भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया था लेकिन हनुमान जी को देखकर सूर्यदेव ने उन्हें दूसरा राहु समझा था। इस दिन चैत्र महीने की पूर्णिमा थी जबकि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को उनका असल में जन्म हुआ था। एक दूसरी मान्यता के अनुसार, हनुमान जी की राम के प्रति ऐसी भक्ति और समर्पण को देखते हुए माता सीता ने उन्हें अमरता का वरदान दिया था और वो दिन नरक चतुर्दशी का था, हालांकि वाल्मिकी जी ने अपनी रामायण में जो लिखा उसे ही सच माना जाता है।

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इसलिए हनुमान जयंति (Hanuman Jayanti) या हनुमान दिवस दीपावली के समय पर ही मनाई जानी चाहिए, और यही सत्य है। इस दिन हनुमान भक्तों को उनकी विशेष पूजा करनी चाहिए और उनकी मूर्ति पर सिंदूर से लेप लगाकर इनकी पूजा आरंभ करनी चाहिए। हिंदू धर्म में हनुमान जयंती के दिन बजरंग बली की पूजा करने वालों के सभी तरह के कष्ट मिट जाते हैं और उन्हें किसी तरह का भय भी नहीं रहता है। लंबे समय से रुके हुए व्यक्ति के काम पूरे हो जाते हैं लेकिन कई बार लोग हनुमान जी की पूजा करते समय अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिसके कारण हनुमान जी प्रसन्न होने के बजाय क्रोधित हो जाते हैं, चलिए बताते हैं कि हनुमान जयंती पर उनकी पूजा करते समय इन गलतियों को आप बिल्कुल नहीं करें..

  1. बजरंग बली को लाल रंग बहुत प्रिय है और ऐसे में पूजा करते समय आप लाल रंग के कपड़े के अलावा कोई भी कपड़े का उपयोग नहीं करें। इस कपड़े पर ही लाल रंग के फूल और बूंदी के लड्डू अर्पित करें।
  2. हनुमान जी की पूजा करने वाले भक्त अगर मंगलवार या हनुमान जयंती पर उपवास रखते हैं तो उसमें नमक का सेवन बिल्कुल नहीं करें। इस बाद का खास ख्याल रखें कि दान में दी गई वस्तुओं में भी नमक वाली चीज नहीं हो।
  3. बजरंग बली शांतिप्रिय देवता माने जाते हैं तो इसलिए इनकी पूजा शांत मन से ही करनी चाहिए। अगर आपका मन अशांत है या फिर आपको किसी बात पर क्रोध आ रहा है तो ऐसे में इनकी पूजा नहीं करें।
  4. बहुत कम लोग जानते हैं कि हनुमान जी की पूजा में कभी चरणामृत का प्रयोग नहीं करते हैं। मांस-मदिरा का सेवन करने के बाद भी कभी हनुमान मंदिर नहीं जाना चाहिए।
  5. हनुमान जी ब्रम्हचर्य का पालन करते थे तो इनकी पूजा करते समय इसका पालन भक्त को भी करना चाहिए। इस बात का खास ध्यान रखें कि हनुमान जी की पूजा स्त्रियां करें लेकिन उनकी प्रतिमा को स्पर्श नहीं करें।

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